UPTGT Syllabus 2022: Download PDF: Syllabus Website

All UP TGT preparing candidates can read or download UPTGT Syllabus and pattern from here. UPSESSB conducts the TGT exam for Trained Graduate Teacher for Govt. schools in Uttar Pradesh.

As you know UPSESSB provides all subjects TGT syllabus in Hindi.

TopicsDetails
UPSESSB Full Form Uttar Pradesh Secondary Education Selection Board
UPTGT Official Websitewww.upsessb.org
Name of PostsTGT (Trained Graduate Teachers) & PGT (Post Graduate Teachers)
No. of Vacancy of 2022 Notification4163
InterviewNo
Selection ProcessOnly written examination
Exam mode Offline (OMR Sheet Based)
Exam Date 2022 Update Soon

UP TGT Exam Pattern

Candidates should study the exam pattern before starting their preparation. These are some important points you need to know.

  • There are 125 questions of related subject
  • Each question is of 4 marks
  • Total marks 500
  • All questions are multiple choice based (MCQs)
  • The exam duration is 2 hours
  • There is no negative marking for this exam.
ParticularsDetails
Total Marks of Exam500
Total Questions125
Each Question Marks4
Exam Duration2 Hours
Exam TypeMCQ based
Negative MarkingNo (There is no Negative Marking for UPTGT)
Exam Mode Pen Paper Based (Offline)
Questions Asked in Exam only from Subjects

UPTGT Subjects

These are UP TGT subjects for which the commission conducts the TGT exam. You need to read and study your subject syllabus here.

  1. English (अंग्रेजी)
  2. Hindi (हिन्दी)
  3. Sanskrit (संस्कृत)
  4. Urdu (उर्दू)
  5. Science (विज्ञान)
  6. Mathematicss (गणित)
  7. Biology (जीव विज्ञान)
  8. Home Science (गृह विज्ञान)
  9. Social Science (SSt) (सामाजिक विज्ञान)
  10. Arts and Painting (चित्रकला)
  11. Music (संगीत)
  12. Commerce (वाणिज्य)
  13. Agriculture (कृषि)
  14. Physical Education (शारीरिक शिक्षा)

UPTGT Detailed Syllabus

UPTGT aspirants can read subject-wise syllabus here.

UP TGT English Syllabus

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – Subject-English (04)

SECTION 1-LANGUAGE

A. Unseen Passage for Comprehension.

B. Part of speech, Spelling, Punctuation, Vocabulary, Tense, Narration, Preposition Usage, Transformation and Agreement.

SECTION 2-LITERATURE

A. Forms of literature

B. Authors and their work-Shakespeare, John Milton, William Wordsworth and John Galsworthy.

UP TGT Sanskrit Syllabus 

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषयः-संस्कृत (62)

गद्य, पद्य एवं नाटक-अधोलिखित, ग्रन्थों के निर्धारित अंकों के आधार पर शब्दार्थ, सूक्तियाँ, शब्दों की व्याकरणात्मक टिप्पणी, चरित्र चित्रण तथा ग्रन्थकर्ता का परिचयः-

कादम्बरी-(शुकमासोप्रदेश मात्र), शिवराज विजयम्, (प्रथम निःश्वास), किरातर्जुनीयम् ( प्रथम सर्ग) मेघदूतम् (सम्पूर्ण) नीतिशतकाम् (सम्पूर्ण) अभिज्ञान शाकुन्तलम् (चतुर्थ अंक) और उत्तर राम चरितम् (तृतीय अंक)।

व्याकरण-डा0 राम बाबू सक्सेना कृत “संस्कृत व्याकरण प्रवेशिका’ के आधार पर सन्धि, समास, कारक एवं प्रत्याहार का प्ररिचय, अकारान्त, इकारान्त उकारान्त, ऋकारान्त, पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसक लिंग शब्दों का रूप्र. सये, यत्, किम्, युष्मद् इदम्, अस्मद, अयम् सर्वनामों के रूप एक से सौ तक की संख्याओं के संस्कृत शब्दों का ज्ञान, भू, गम्, प्रल्, पा, ला, हुन्, दुह, दा, भी, दिव, जनि, तुद, रथ, प्रच्छ, बू तथा चूर धातुओं के लट्, लोट्, लुट, लड़ और विधिलिंड़ में रूप।

संस्कृत सुभाषित एवं सूक्तियों का परिज्ञान, वाक्य परिवर्तन और अशुद्वि परिमार्जन ।

प्रशिक्षणात्मक संस्कृत प्रशिक्षण की दृष्टि से व्याकरण, अनुवाद, पद्य आदि की पाठन’ विधियों का सामान्य परिचय।

UP TGT Urdu Syllabus 

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-उर्दू (03)

उर्दू जबान की मुखतसर तारीख (पैदाइश और तरक्की), दिल्ली और लखनऊ के दबिस्तान, उर्दू शाइरी का इर्तिका, उर्दू अस्नाफे नजम-ओ नस्त्र (नावेल, दास्तान, अफसाना, ड्रामा, गजल, कसीदा, मंसनवी, नग गर्सिमा) तरक्की गसन्द तहरीक (इब्तिवा और इर्तिका), गशहूर किताबें-बाग-ओ बहार, फसानए आजाइय, फसानए आजगद, शेरूल, अजग, मुकद्दम-ए-अनीस-ओ-दबीर, हजारी शहरी मशहूर मुसन्निफीन और श्मदूर-गीर अम्मन, रजब अली बेम सुरूर सर सय्यद, अबुल कलाम आजाद, मौलाना मुहम्मद हुसैन आजाद, मीर, मालिब, मोबिम, इकबाल, चकबस्त, अकबर इलाहाबादी, फिराक, फेज, कबाइद जमाना (माजी, हाल, मुस्तकार्बिल), तजकीर-ओ-तानीस, जमा वाहिद, तशबीह, इस्तेआरा, तजनीस, इस्म, सिफ्त जमीर, फैल, हुस्नतालीन, तजाद, लफ-औ-नश्र मुहावरे और कहावतें, जदीद दौर के मशहूर शाइर और अदीब, अख्यारात, रिसाले, अफसानानिगार, मावेलनिमार।

UP TGT Science Syllabus 

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-विज्ञान (05) – 

(अ) भौतिकी

विमा एवं मापन -एस०आई०पद्धति में मूल मात्रक व्युत्पन्न मात्रक, इकाईयों का एक पद्धति से दूसरी पद्धति में परिवर्तन, विमीय विधि से समीकरों का सत्यापन, अदिश एवं सदिश राशियाँ।

गति एवं बल-सापेक्षिक गति, न्यूटन का सपैक्षिक गति का सिद्धान्त, विस्थापन, चाल एवं वेग, रेखीय गति, कोणीय गति और उनका संबंध, सरल रेखीय गति सतत् एवं विभिन्न गतियाँ, जाड़त्व का सिद्धान्त, बल त्वरण, गति के समीकरण, स्थितिज एवं गतिज उर्जा रेखी संवेग एवं कोणीय संवेग, उर्जा एवं संवेग का संरक्षण, स्थितिज एवं गतिज उर्जा का एक दूसर में परिर्वतन, गुरुत्वीय एवं जड़त्वीय द्रव्यमान, न्यूटन के गति के नियम, क्रिया एवं प्रतिकिया, घूर्णन गति, बलयुग्म, क्षद्मबल, अगकेन्द्रिय एवं अगिकेन्द्रियबल, कोरियलिस बल, न्यूटन गुरूत्व का नियम, केपलर का नियम, प्रक्षेप्य की गति, उपग्रहीय गति भूस्थिर उपग्रह, पलायन वेग, गुरुत्वीय त्वरण, ऊँचाई, गहराई, भूसतह एवं भूगति के अनुसार “जी” में परिवर्तन, सरल आवर्त गति और उनका लाक्षणिक गुण, सरल लोलक, संरक्षित एवं असंरक्षित बल, प्रत्यानयन बल, आवर्तकाल को प्रभावित करने वाले कारक, त्वरण एवं बिना त्वरण वाले फ्रेम  (लिफ्ट) भारहीनता की अवस्था ।

उष्मा– ऊष्मा एवं तापमान की संकल्पना, एक पैमाने से दूसरे पैमाने में ताप रूपान्तरण का मापन, तापमान का परम ताप, तापीय रगम्य, ठोसों में प्रसार, रेखिक, बाहय एवं घनाकार एवं सरल रेखी बहाव से उनके संबंध, आकमोद्राविक ठोस, उष्मा चाल, साम्य अयस्था ताप प्रवणता, अच्छे एवं बुरे चालक, उष्मा का संवहन, संवहन  धारा, मायासी, एवं वास्तविक पसार, उष्मा का विकिरण, उत्सर्जकता, अवशोषकता, किरचाफ के नियम, बीन्स का विस्थापन का नियम, किसी कृष्णिका से विकिरण का प्लाक का नियम, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के रूप में विकिरण, वाय एवं उर्जा घनत्व न्यूटन का शीतलन का नियम विकिरण संशोधन, स्टीफन का नियम, ताप सामर्थ्य, ऊष्मा का जल तुल्यांक, ठोसो दवों एवं गैसों के विशिष्ट उष्मा, मेंयर का सम्बन्ध, एक परमाणुक. द्विपरमाणुक एवं त्रिपरमाणुक, गैसों के लिए विशिष्ट उष्मा का अनुपात उष्मा का मापन, कैलोरीमीटर, अवस्था में परिवर्तन, आईना, हाइग्रोमीटर उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक, उष्मामतिकी का पथम नियम।

प्रकाश– गोलीय दर्पण एवं लेन्स, अपवर्तनाक, प्रतिबिम्ब का बनना, मानव की आँख, विपणन, अवर्णता, दूर एवं निकट दृष्टिदोष, स्पष्ट दृश्यता की न्यूनतम् दूरी, व्यतिकरण, विवर्तन तथा धुवीकरण की मूल अवधारणाये।

विद्युत– सेल, प्राथमिक एवं द्वितीयक सेल, आंतरिक प्रतिरोध, विद्युत वाहक बल,  इलेक्ट्रिानिक एवं चालन धाराएँ, अनुगमन वेग, माध्ययुक्त पथ, विश्राम काल, ओम का नियम. श्रेणीक्रम एवं समान्तर क्रम में प्रतिरोध, धारा एवं विभवान्तर का मापन, गैल्वेनोमीटर का अमीटर एवं वोल्टमीटर  में परिवर्तन, प्रतिरोध का मापन, हीट स्टोन सेतु, पोस्ट ऑफिस बॉक्स मीटर सेतु, ए0सी0 एवं डी0सी0 धाराओं में भेद, ट्रान्सफार्मर, चोक मीटर एवं जनरेटर।

आधुनिक भौतिकी– परमाणु की संरचना, परमाणु का वेक्टर माडल, बोर का हाइड्रोजन परमाणु सिद्धान्त, परमाणु उर्जा की मूल संकल्पना, सलयन, विखण्डन, किरणों का निर्माण, प्रकाश वैद्युत प्रभाव, पी०एन० संधि, प्रबंधक की मूल संकल्पना।

(ब) रसायन विज्ञान

द्रव्य-प्रकृति एवं व्यवहार द्रव्य के प्रकार, तत्व एवं उनका वर्गीकरण (धातु एवं अधातु) यौगिक एवं उनके मिश्रण।

रासायनिक संयोग के नियम-स्थिर, अपवर्त्य एवं व्युत्क्रम अनुपात का नियम. गैलुसक का गैसीय आयतन संबंधी नियम. मिशरलिक का समाकृतित्व का नियम।

पदार्थ की संरचना– डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त, परमाणु, अणु एवं उनके अभिलक्षण। 

परमाणु संरचना– इलेक्ट्रान प्रोटान तथा न्यूट्रान की खोज। रदरफोर्ड का अल्फा किरण प्रकीर्णन प्रयोग तथा नाभिक की खोज।  रदरफोर्ड, बोहर एवं समरफील्ड के परमाणु मॉडल। क्वाटम संख्याएं, आधुनिक परमाणु सिद्धान्त।

डीब्राग्ली समीरण, हाईजेनन वर्ग– अनिश्चतता सिद्धान्त एस0पी0 तथा डी0 कक्षकों की आकृति अफबाऊ सिद्धान्त, हुण्ड के नियम एवं पाउली के अपवर्जन सिद्धान्त के आधार पर तत्वों का इलेक्ट्रानिक विन्यास।

रेडियों सक्रियता– रेडियों सक्रियता की खोज, रेडियों सक्रिय किरणे एवं उनके गुण, अर्धायु काल एवं औसत आयु, रेडियों सक्रिय क्षय के नियम, नाभिकीय विखण्डन एवं सलयन, कृत्रिम रेडियों सक्रियता। समस्थानिक, सम्भारी एवं समन्यट्रानिक। 

रसायनिक आबंधन– संयोजकता की मूल अवधारणा, इलेक्ट्रानिक सिद्वान्त, अष्टक नियम, अष्टक नियम के अपवाद, वैधुतसंयोजी, सहसंयोजी एवं उप सहसंयोजी आबंध । आयनिक सहसंयोजी एवं उप सहसंयोजी यौगिक के अभिलक्षण। ध्रुवण एवं फजान नियम। अक्रिय युग्म प्रभाव सह संयोजकता का संयोजकता आयंध सिद्धान्त (हाइड्रोजन अणु के लिए) संकरण तथा एस.पी.एस.पी. 2 एवं एस. पी. 3 संकर कक्षकों की आकृति।

रासायनिक अभिक्रियायें-संकेत/प्रतीक आयन एवं सूत्र। रासायनिक अभिक्रियाओं की रासायनिक समीकरणों द्वारा प्रस्तुति। भौतिक एवं रासायनिक परिर्वतन एवं उनमें अंतर।

रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार-विस्थापन, योगात्मक, वियोजन, अपघटन, द्विअपघटन, मंद तीव्र. उष्माक्षेपी. उल्फाशोषी एवं उत्प्रेरित अभिक्रियायें।

वैद्युत रासायनिक सेल– वोल्टाइक सेल एवं इसके कार्य की क्रिया विधि । शुष्क सेल, लेड भंडारण बैट्री, उत्क्रमणीय सेल, इलेक्ट्रोड विभव, नर्स्ट समीकरण एवं इसके अनुप्रयोग।

तत्वों का आवर्त वर्गीकरण– मेन्डलीफ का आवर्ती वर्गीकरण एवं इसका आधार, मंडलीफ आवर्त सारिणी के गुण एवं दोष, आवर्त सारिणी का परिवर्तित रूप एवं इसके महत्वपूर्ण लक्षण, तत्वों के आवर्ती गुण (परमाणु एवं आयनिक त्रिज्याएँ आयनन विभय, इलेक्ट्रान बंधुता तथा विधुत ऋणात्मक) वर्गों एवं आवर्गों में आवर्तन गुणों का परिर्वतन । एस. तथा पी. ब्लाक तत्वों के सामान्य गुण। प्रथम पंक्ति के संक्रमण तत्वों (3 डी0 ब्लाक के तत्वों)  के गुणों की उनके इलेक्ट्रानिक्स विन्यास, आक्सीकरण अवस्था, रंग चुम्बकीय गुण एवं जटिल यौगिकों के निर्माण के संदर्भ में विवेचना।

सामान्य कार्बनिक रसायन– प्रेरणिक, इलेक्ट्रोरिक तथा मेसोमेरिक प्रभाव। अतिसंयुग्मन, अनुनाद, एवं उनके अनुप्रयोग, इलेक्ट्रान रनेही एवं नाभिक स्नेही अभिकर्मक, मुक्तमूलक, कार्बोकेटायन एवं कोर्वोएगायन। हाईडोजन आपंधन एवं इसके प्रभाव। कार्बनिक यौगिक का वर्गीकरण एवं उनको नामकरण।

समावयता– संरचनात्मक एवं त्रिविम समावयता, कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि की अवधारण। सरल प्रतिस्थापना, योगात्मक एवं निराकरण अभिक्रियाओं की क्रियाविधि। निम्न कार्यनिक यौगिकों के बनाने की विधियाँ एवं उनके गुण- एल्केन, एल्कीन, एल्काइन, एलिकलहैलाइड, कीटेन, एसिड एवं उनके व्युत्पन्न बेन्जीन, इसका निर्माण, गुण एवं संरचना।

UP TGT Biology Syllabus 

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-जीव विज्ञान (06)

(अ) जन्तु विज्ञान

विभिन्न संघों के निम्नलिखित प्रतिनिधियों का वर्गीकरण, स्वभाव, संरचना तथा जीवन चक्र प्रोटोजोआ-एन्टी अमीबा, प्लाज्मोडियम, पैरामीसियम, युग्लिना, प्रोटोजोआ तथा उनके द्वारा उत्पन्न रोग, पोरीफेरा ल्युकोसोलिनिया, साइकॉन सीलेन्ट्रेटा हाइड्रा, कओबिलिया, आरिलिया, हेल्मिन्थ फेशियोला, टीनिया, ऐस्केरिस, हेल्मिन्थ तथा उनके द्वारा उत्पन्न रोग, एनिलिडा, नीरिस, फेरिटिमा, जोक, आथेपोडा, तेल चट्टा, मस्का, मच्छर, झीगा, कीटों का आर्थिक महत्व मोलस्का-यूनियनों पाइला, इकाइनोडरमेटा-सितारा मछली, कोडैटा, प्रोटोकार्डेटा हर्डमानिया, एम्फियाँयाक्सस, वटेबेटा, मतस्य स्कोलियोडॉन ऐम्फिबिया-राना, रेप्टिलिया-यूरोमेस्टिक्स अथवा कोई अन्य, छिपकली, एवीज,

कोलम्बा, गैमेलिया-खरहा।

कोशिका विज्ञान-कोशिका की सूक्ष्म संरचना, सूत्री व अर्थसूत्री विभाजन, युग्मक-जनन, आनुवंशिकी-मेण्डल वाद, सहलग्नता व जीन विनियम, सुजनिकी, जैव विकास, विकास के प्रमाण, विकास के सिद्धान्त लेमार्कवाद, नव-लेमार्कवाद, डार्विनवाद, नव-डार्विनवाद, विकास का सयोगात्मक सिद्धान्त-विकास की क्रिया विधि-उत्परिवर्तन, विभिन्नता, पार्थक्य, युगों के अन्तर्गत विकास, मानव का विकास, पारिस्थितिकी, पारिस्थिति तन्त्र की मूल धारणा मुख्य पारिस्थितिक प्रखण्ड, प्रदूषण का सामान्य ज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान व जैव रसायन पाचन क्रिया, श्वसन, क्रिया,

परिसंचरण व रूधिर उत्सर्जन तंत्रिकीय संचारण तथा अन्तःवासी तन्त्र का प्रारम्भिक ज्ञान। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, एन्जाइम तथा हार्मों के गुणों व वर्गीकरण संबंधी प्रारम्भिक ज्ञान, भ्रूण विज्ञान, एफियॉक्सस, मेढ़क तथा कुक्कट के परिवर्धन की रूप रेखा, स्तनियों के अप्ररा, प्राणि भूगोल-मुख्य प्राणि भौगोलिक परिमण्डल तथा उनके निवासी प्राणी।

(ब) वनस्पति शास्त्र

विषाणु-परिभाषा, प्रकृति, पारगमन, लक्षण तथा महत्व, जीवाणु रूप एवं संरचना, प्रजनन तथा आर्थिक महत्व, लाइकेन और समन्वय तथा आर्थिक महत्व, शैवाल-शैवालों का वर्गीकरण, मुख्य सूहों के विशिष्ट लक्षण जैसे नीरू हरित शैवाल, एवं झूरी शैवाल, नास्टाक क्लैमाड़, डोमोनस, वॉलवाक्स, यूलोथिक्स स्पाइरोगाटूरा, उड़ागोनियम, इक्टोकार्पस बैट्रकों स्पैम, की प्रकृति संरचना तथा जीवन चक्र शैवाल का आर्थिक महत्व, एलैक्सोपोलस म्यूकर, राइजोपस कवकों का वर्गीकरण, मुख्य समूहों के विशिष्ट लक्षण, पीथियम, एलब्यूगों सैक्रोमाइसीज, पेन्टिसीलियम, पक्सीनियम, एगैरिकस, की प्रकृति, संरचना, प्राप्ति तथा जीवन चक्र कवक का आर्थिक महत्व । 

बायोफाइटा वर्गीकरण, मुख्य समूहों के लक्षण। रिक्तियाँ, पार्कोन्सियम तथा फ्यूनेरिया की प्राप्ति और जीवन चक्र। टैरिडोफाइटा-वर्गीकरण, मुख्य सूहों के लक्षण। लाइकोपोडियम, से लौजेनेहा, इक्वीसीटम तथा मारसीलिया की प्राप्ति संरचना व जीवन चक्र, अनावृतबीजी-वर्गीकरण, मुख्य समूहों के लक्षण, साइकस तथा पाइनस की प्राप्ति संरचना, जीवनचक्र और आर्थिक महत्व। जीवाश्मिकी भू-वैज्ञानिक समय सारिणी, जीवाष्मों के प्रकार तथा जीवाष्मीकरण, जीवाश्मिीकी महत्व ।

वार्णिकी– आवृतबीजियों का बेन्थम-हूकर का वर्गीकरण। रैननकुलेसी, क्रूसीफेरी पापावरेसी, कैरियोफिल्लेसी, लैग्यूमिनोसी, रोजेसी, सोलेनसी, कुकरबिरेगी, अम्बेलिफेरी, कम्पोजिटी, सोलमेसी, एकैन्थेसी, लैबिएटी, यूफोरबिएगी विलिऐसी तथा ग्रैमिली का क्रमबद्ध अध्ययन ।

आर्थिक वनस्पति विज्ञान– इमारती लकड़ी रेसे, तेल, औषधिया, पेय तथा मसाले देने वाले पौधो का ज्ञान । अकारिकी तथा शरीर-जड़, तना, पत्ती तथा पुष्प के विशिष्ट लक्षण और रूप पुष्पक्रम, ऊतक तथा उतक यंत्र, तना तथा पत्ती के शारीरिक लक्षण। आर्किडफाइकम तथा टिनोस्पोरा में जड़ और ड्रेसीना, अपरेन्थस, बोरहा विया, तथा निकटटैन्थिस के तनों के विशेष संदर्भ में सामान्य तथा असंगत द्वितीयक बृद्धि।

भ्रौणिकी– लघुजीवाणी जनन, गुरू बीजाणु जनन, बीजाण्ड भ्रूणकोष तथा भ्रूणकोष के विशेष संदर्भ में आवृत बीजियों का जीवनचक्र। पारिस्थितिकी और पर्यावरण स्वपारिस्थितिकी, पादप समुदाय, परितंत्र, पादप क्रमण और अनुकूलन। पर्यावरण तथा उसके मुख्य घटक और उनका मानव पर प्रभाव।

 कोशिका विज्ञान– आनुवंशिकी तथा विकास, पादप कोशिका, कोशिका भित्ति, कोशिका कला, कोशिकांग तथा कोशिका विभाजन का प्रारम्भिक ज्ञान और इनका महत्व गुणसूत्र संरचना तथा रसायन, मण्डलवाद, सहलगनता और जीन विनियम, लिंग निर्धारण, उत्परिर्वन, तथा बहुगुणिता, विकास के सिद्धान्त ।

शरीर क्रिया विज्ञान– जल अवाशोषण, रसारोहण, वाष्पोत्सर्जन, अनिवार्य तत्व, हास, लक्षण, प्रकाश संश्लेषण, श्वसन, श्वसन कार्बनिक विलेयों का स्थानांतरण, प्रोटीन संश्लेषण, नाइट्रोजन चक्र, वृद्धि पदार्थ तथा संचालन। मृदा विज्ञान, मृदा रचना तथा प्रकार, मृदा अपरदन। 

UP TGT Mathematics Syllabus 

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-गणित (07)

वाणिज्य/गणित– काम समय और चाल समय, चक्रवृद्धि ब्याज, बैकिंग, कराधान, प्रारम्भिक नियमों का प्रवाह सचित्र ।

सांख्यिकी– बारंबारता बटन, सांख्यिकी आकड़ों का आलेखीय निरूपण, केन्द्रीय प्रवृत्ति की मापे, विक्षेपण की मापे, जन्म/मृत्यु सांख्यिकी, सूचकांक ।

बीजगणित– करणी, बहुपद और उनके गुणनखण्ड, लघुगणक, दो अज्ञात राशियों के रेखिय समीकरण, बहुपदों के महत्तम समापर्वतक और लघुत्तम समापवर्त्य एक घातीय तीन अज्ञात राशियों के युगपत समीकरण, द्विघात बहुपद के गुणनखण्ड, द्विघात समीकरण, अनुपात व समानुपात, संख्या पद्धति समुच्चय संक्रियायें, प्रतिचित्रण।

सारणिक– परिभाषा, उपसारणिक एवं सहखण्ड, 3×3 क्रम तक के नागरिक का विस्तार सारणिक के सामान्य गुण ऊयमर के नियम की सहायता से n रैखिक समीकरणों (n=3) के निकाय का हल, आब्यूह के प्रकार, 3×3 क्रम तक के आव्यूहों का योग का गुणनफल परिर्वतन आव्यूह सममित और विषम सममित आव्यूह, का प्रतिलोम आब्यूह की सहायता से तीन अज्ञात राशियों के युगपत समीकरण का हल, समीकरण सिद्धान्त, मूलों के सममित फलन, अंकगणितीय, गुणोत्तर, हरात्मक, श्रेणियां, तथा प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों और घनों के पदों से बनी श्रेणी का योग। क्रमचय और संचय, द्विपद प्रमेय, चरघातांकी और लघुगणकीय श्रेणी का योग। प्रायिकता-योग तथा गुणन के सिद्धान्त।

समुच्चय सिद्धान्त– समुच्च बीजगणित के नियम, तुल्यता, संबंध, प्रतिचित्रण, प्रतिचित्रणों का संयोजन प्रतिलोम प्रतिचित्रण, पियानों के अभिगृहीत तथा आगमन अभिगृहित के प्रयोग।आंशिक समूह और समूह समाकारिता, उपसमुच्चय द्वारा जनित उपसमूह, चक्रीय समूह, किसी अपयव की कोटि, चक्रीय समूह के उपसमूह, सहसमुच्चय वियोजन, लैंगरान्ज प्रमेय ।

वास्तविक विश्लेषण– वास्तविक संख्याओं की अभिगृहीतियाँ, समुच्चयों की गणनीयता दूरी समष्टि, सामीप्य, विवृत समुच्चय, संवृत समुच्चय, व्युत्पन्न समुच्चय सघन समुच्चय परिपूर्ण समुच्चय बोल्जैनों-विस्ट्रास प्रमेय सहित अन्य सामान्य प्रमेय। वास्तविक संख्याओं के अनुक्रम-अनुक्रम की सीमा, अधिकारी अनुक्रम, अपसारी, अनुक्रम परिबद्ध अनुक्रम, एकदिष्ट अनुक्रम, अभिसारी अनुक्रमों की संकियायें, कोशी अनुक्रम, सीमा संबंधी कोशी प्रमेय और

वास्तविक अनुक्रम की अभिसरिता पर कोशी सिद्वान्त। सीमा व सातत्य वास्तविक मान वाले फलनों की सीमा, वाम पक्ष और दक्षिण पक्ष सीमा, फलन का सातत्य, संतत फलनों की विशेषताएं, असातत्य और इसके प्रकार।

त्रिकोणमिती– वृत्तीय माप तथा विशिष्ट कोणों के त्रिकोणीमितीय अनुपात, दो कोणों के योग और अन्तर के तथा किसी कोण के अपवर्त्य एवं अपवर्तक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात, त्रिकोणमितीय सर्वतमिकायें, त्रिकोणमितीय समीकरण, त्रिभुज का हल, परिगम अन्त एवं वाहय वृत्तों की त्रिज्यायें एवं गुण, प्रतिलोम वृत्तीय फलनों के सामान्य गुण ।

सम्मिश्र संख्यायें– उनके योग तथा गुणनफल. डिमाइवर प्रमेय और इसका प्रयोग उचॉई और दूरी। सम्मिश्न राशियों के चरघातांकीय फलन, वृत्तीय फलन एवं हाइपर। बोलिक फलन-वास्तविक व अधिकल्पित भागों में पृथक्करण।

ज्यामिती– बोधायन पाइथागोरस सिद्वान्त व इसका विस्तार, वृत्त व वृत्तखण्ड, वृत्त के चाप व जीवा वृत्त की स्पर्श रेखा, एकांतर वृत्त खण्ड और उसके कोण, जीवा के खण्ड और उनसे निर्मित आयत, रेखीय सममतल आकृतियों की समरूपता।

निर्देशांक ज्यामिती– कातीय तल, रेखा, द्वितीय घात के व्यापक समघातीय समीकरण, द्वारा निरूपित सरल रेखा युग्म। इनके बीच का कोण व अर्धकों के युग्म का समीकरण, समकोणीय कातीर्य निर्देशांकों में शंकव (वृत्त, परवलय. दीर्घ वृत्त व अति परवलय) के मानक समीकरण व प्राचलिक समीकरण, द्विघात व्यापक समीकरण द्वारा रेखा युग्म, वृत्त, परवलय दीर्घवृत्त व अति परवलय निरूपति करने के प्रतिबन्ध, मूल बिन्दु व अक्षों के स्थानान्तरण की सहायता से वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त व अतिपरवलय के समीकरण प्राप्त करना, शांकव के किसी बिन्दु पर स्पर्शी व अभिलम्ब-छेदक रेखा का शांकव से प्रतिच्छेदन, सीमान्त स्थिति, में इसके स्पर्शी होने का प्रतिबन्ध, स्पर्शियों के प्राचलिक समीकरण, वाहा बिन्दु से शांकव पर स्पर्शी युग्म। शांकव के किसी बिन्दु पर अभिलम्ब का समीकरण-स्पर्श करने अथवा अविलम्ब होने का प्रतिबन्ध, ध्रुवीय निर्देशाकों (द्विविगीय) में शांकव का मानक समीकरण, गोला, शंकु व बेलन का त्रिविमीय ज्यामिती।

कलन-अवकलन– अवकलन की परिभाषा, बीजीय, त्रिकोणमितीय, चरघातांकी तथा लघुगणकीय फलनों का अवकलन, स्पर्शरेखा व अभिलम्ब, एक चर राशि के फलन के उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ सरल वक्रों का अनुरेखण | 

समाकलन– खण्डशः तथा प्रतिस्थापन से समाकलन, आंशिक भिन्नों की सहायता से समाकलन, निश्चित समाकलन व इसके प्रयोग समतलीय वक्रों के अन्तर्गत क्षेत्रफल, बेलन, शंकुव गोले के अवकलन व पृष्ठ ज्ञात करने में समीकरण अवकलन समीकरण की कोटि व घात । गुरूत्वाधीन सरल रेखीय सरल गति के उदाहरणों में निम्नलिखित रूप से समीकरणों को हल करना-

(i) dyl de = f (x) (ii) dyl de = f(x) (iii) py)(3)/dx2 = f(x)

सदिश विश्लेषण– क्रमिक युग्म व क्रमिक त्रिक के रूप में स्थित संदिश, विस्थापन सदिश मुक्त सदिश, इकाई सदिश, मापांक तथा दिक्कोजया, बराबर सदिश, सदिशों के योग (बल, वेग, त्वरण) का संयोजन। दो सदिशों का अन्तर-सापेक्ष वेग, दो सदिशों का अदिश व सदिश गुणन। कार्य की गणना, बल आघूर्ण व टार्क की गणना में इनका प्रयोग। सदिशों का त्रिगुणन।

स्थिति विज्ञान-तीन बल लगे पिण्डों का संतुलन, लामी का प्रमेय, त्रिभुज का नियम त्रिकोणमितीय प्रमेय एवं दो समकोणीय बलों में नियोजन। संतुलन के सामान्य प्रतिबन्ध

गति विज्ञान-गुरूत्व के अधीन उध्वधिर सममतल में गति प्रक्षेप्य की गति, कार्य, उर्जा, सामर्थ्य एम०के०एस० प्रणाली में गणना। गुरूत्व केन्द्र।

UP TGT Home Science Syllabus

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक विषय-गृह विज्ञान (08)

आहार एवं पौष्टिकता– पौष्टिकता की संकलपना, आहार की संरचना, एवं कार्य, संस्तुलित आहार, आहार वर्ग का वर्गीकरण और उनका स्रोत, पौष्टिकता, अल्पता के रोग, आहार तैयार करना, खाद्य संरक्षण एवं मिलावट, विभिन्न रोगों जैसे-ज्वर, टाइफाइड, अल्सर, मधुमेह, गुर्दा, एवं दिल रोग के रोगियों के लिए आहार। मानव शरीर की संरचना, भोजन का पालन, अवशोषण और चयापचय, सामान्य रसायन ।

गृह प्रबंधन– गृह प्रबंधन का अर्थ एवं परिभाषा, परिवार संसाधन, परिवार बजट समय, ऊर्जा, एवं धन का प्रबन्धन, निर्णय लेना, लक्ष्य मूल्य और प्रतिमान, पारिवारिक आवश्यकता, कार्य सरलीकरण बचत, और आन्तरिक एवं वाहय सज्जा, गृह एवं पारिवारिक यंत्र।

स्वास्थ्य – स्वास्थ्य का अर्थ एवं परिभाषा, व्यक्ति का स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्यरत सरकारी और गैर सरकारी संगठन, स्वास्थ्य के लिए पर्यावरण का महत्व, पर्यावरण प्रदूषण, स्वास्थ्य प्रकोप के रूप में जल एवं वायु जनित रोग, प्राथमिक स्वास्थ्य रक्षा के सिद्वान्त, पारिवारिक सामान्य दुर्घटनाएं उनका निदान विभिन्न प्रकार के पट्टियों का उपयोग ।

बाल विकास– बच्चों की वृद्धि एवं विकास, बच्चों की मृत्यु एवं रूग्णता, विद्यालयीय स्वास्थ्य, विवाह एवं परिवार। 

वस्त्र एवं सिले कपड़े वस्त्र, रेशें का वर्गीकरण और उसका रसायन, परिधान की बनावट एवं उसकी सजावट, कपड़ों की रंगाई एवं धुलाई विभिन्न अवसरों और विभिन्न मौसमों में लिवाश का चुनाव उसका निर्माण । 

प्रसार शिक्षा– गृह विज्ञान का अर्थ, परिभाषा, इतिहास, विषयक्षेत्र गृह विज्ञान के विविध शाखाओं और उनका अन्तर्सम्बंध, प्रसार शिक्षक की आवश्यकता, विषय क्षेत्र एवं दर्शन प्रसार के विभिन्न विधियाँ, सामुदायिक विकास।

UP TGT Social Science (S.St) Syllabus

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-सामाजिक विज्ञान (09)

(अ) भूगोल (Geography)-

भौतिक भूगोल– सौर मण्डल-उत्पत्ति सौर मण्डल में पृथ्वी की आकृति एवं गतियां, पृथ्वी की गतियों के प्रभाव, सूर्य ग्रहण एवं चन्द्रग्रहण, अक्षांश देशान्तर का निरूपण, ग्लोब पर किसी स्थल की अवस्थिति का निर्धारण, स्थानीय एवं प्रामाणिक समय का निर्धारण, अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा-अनुरेखन एवं महत्व ।

स्थलमण्डल– चट्टान, उत्पत्ति एवं प्रकार, ज्वालामुखी क्रिया/ज्वालामुखी के प्रकार एवं विश्व वितरण, भूकंप उत्पत्तियां एवं विश्व वितरण, महादीपों एवं महासागरों का वितरण, पर्वत एवं उनके प्रकार, वलित पर्वतों का विश्व के प्रमुख पठार एवं उनके प्रकार, मैदान एवं नदी घाटिया, अपरदन एवं अपक्षय प्रक्रियायें, डेविस का अपरदन चक्र, नदी घाटी की निम्नीकरण प्रक्रिया, जल अपरदन द्वारा विभिन्न चरणों में निर्मित प्रमुख भू आकृतियाँ, समोच्य रेखायें एवं समोच्य रेखाओं द्वारा प्रमुख स्थल आकृतियों की पहचान।

वायु मण्डल– वायुमण्डल की संरचना, सूर्यताप एवं उसे प्रभावित करने वाले कारक, तापमान का क्षैतिज एवं उर्ध्वाकार वितरण, तापमान विलोमता, वायुदाव पेटियां एवं सनातन पवन, महत्वपूर्ण स्थानीय पवन, वर्षण की प्रक्रिया-वर्षा, पाला कुहरा आदि संवाहनिक, धरातलीय एवं चक्रवातीय वर्षा, विश्व के जलवायु प्रदेश, दैनिक मौसम मानचित्र में प्रयुक्त संकेतों की पहचान ।

जल मण्डल– महासागरों का उच्चावचन, महासागरीय तापमान एवं लवणता, महासागरीय धारायें उत्पत्ति प्रवाह दिशा एवं जलवायुविक प्रभाव, ज्वार भाटा प्रक्रियायें एवं उत्पत्ति के सिद्वान्त।

जैव मण्डल– संरचना, वनस्पति के प्रकार एवं विश्व वितरण तथा संबंधित वन्य जन्तु भाग।

मानव भूगोल– मानव पर्यावरण अतसंबंध, सैद्धान्तिक, विवेचन रेटजेल, डेविस, सेम्पुल, हंटिग्टन, वाइडल डी ला ब्लाश बुस एवं ग्रिफिश टेलर के मत, विश्व में जनसंख्या वृद्वि एवं वितरण का विवेचन, मानव प्रजातियाँ, विश्व की प्रमुख मानव प्रजातियाँ काकेशियस, मंगोलाइड के लक्षणात्मक भेद एवं वितरण, विश्व की आदिम जातियां

एवं तत्संबंधित निवास से अतसंबंध, बशुमैन एस्कीमों, खिरजीज, मसाई, सेमांग के विशेष संदर्भ में।

मानव अधिवास– प्रमुख प्राकृतिक प्रदेशों में ग्रामीण अधिवास के स्वरूप एवं पर्यावरण से संबंध , विश्व के प्रमुख विराट नगर अवस्थिति एवं महत्व।

आर्थिक भूगोल– विश्व की प्रमुख फसलों का भौगोलिक विवेचन चावल, गेहूं कपास, गन्ना, चुकन्दर, चाय, कहवा एवं रबर, विश्व में मत्स्य आहरण, वनदोहन एवं दुग्ध उत्पादन, प्रमुख ऊर्जा एवं खनिज संसाधन-कोयला. पेट्रोलियम, लौह अयस्क मैगनीण पाक्साइट, एवं ताया विश्व में प्रमुख उोगों की अपस्थिति के कारक एवं वितरण लौह इस्पात, सूती एवं कृत्रिम वस्त्र, कागज, तेल, शोधन प्रमुख औद्योगिक प्रदेश, उत्तरी पूर्वी सयुंक्त राज्य किंकी, रूर यूक्रेन, कैण्टन, संघाई ग्रेगयांग, ब्राजील पठार केपटाउन-नेटाल, विश्व के प्रमुख व्यापारिक मार्ग एवं पत्तन ।

भारत स्थिति– विस्तार, अर्न्तराष्ट्रीय सीमायें एवं इससे संबंधित भू-समस्यायें, हिन्द महासागर एवं उसका आर्थिक एवं सामरिक महत्व धरातलीय, स्वरूप, जलप्रवाह, मानसून की उत्पत्ति एवं विशेषताएं, जलवायु प्रदेश मिट्टियां एवं उनका जलवायु एवं प्राकृतिक वनस्पति से अन्तर्सम्बंध निर्वनीकरण, बाढ़ एवं मिट्टी अपरदन की समस्यायें एवं उनके समाधान। 

कृषि– खाद्यान्न उत्पादन, प्रगति एवं समस्यायें हरित, श्वेत एवं नीलकातियां, प्रमुख फसले चावल, गेहूँ, गन्ना, दलहन, तिलहन, चाय के भौगोलिक वितरण एवं उत्पादन प्रवृत्ति खनिज संसाधन एवं उनके दोहन से जुड़ी समस्यायें उर्जा संकट एवं उसका समाधान कोयला एवं खनिज तेल का भौगोलिक विराट एवं उत्पादन, उर्जा के वैकल्पिक स्रोत, बहुउद्देशीय योजनायें एवं उनसे जुडी पर्यावरणीय समस्यायें वस्तु निर्माण उद्योग, लौह, इस्पात, वस्त्र, चीनी, कागज, सीमेंट एवं अल्युमिनियम उद्योगों की अवस्थिति एवं वितरण प्रतिरूप, जनसंख्या वृद्धि एवं विवरण, जनसंख्या जनित समस्या परिवहनों के साधन विदेशी व्यापार, प्रमुख नगर एवं बन्दरगाहा

(ब) इतिहास (History)

पूरा ऐतिहासिक संस्कृतियां पूर्व पाषाण युग, मध्य पाषाण युग, नव पाषाण युग, इनकी प्रमुख विशेषताएं, प्राचीन युग-सिन्धु घाटी, सभ्यता प्रमुख विशेषताएं, वैदिक काल, पूर्व वैदिक काल, उत्तर वैदिक काल, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं आर्थिक जीवन, धार्मिक आन्दोलन जैन धर्म बौद्ध धर्म, भागवत धर्म, और शैव धर्म, मौर्यकाल राजीनति, इतिहास, समाज एवं संस्कृति, गुप्त राजवंश राजनीति इतिहास और समाज एवं संस्कृति, चोल वंश प्रशासन, भारत में इस्लाम का आगमन एवं प्रभाव, विश्लेषण, तटस्थ वक्र द्वारा उपभोक्ता का संतुलन, आय प्रभाव, कीमत प्रभाव, प्रतिस्थापना प्रभाव प्रगदित अभिमान। परिवर्तन शील अनुपातों का नियम एवं पैगार्ग का प्रतिफल निगम, उत्पादन फलनकार, समोत्पाद वक्र विश्लेषण माल्थस एवं अनुकूलतम जनसंख्या सिद्धान्त ।

कीमत निर्धारण के सिद्धान्त– परंपरावादी एवं आधुनिक पूर्ण स्पर्धा एकाधिकार एवं एकधिकृत प्रतियोगिता में फर्म का साम्य।

वितरण का केन्द्रीय सिद्धान्त– रिकार्डों का आधुनिक लगान सिद्धान्त, ब्याज का नवपरम्परावादी एवं कीन्स का सिद्धान्त, प्रो०नाइट का लाभ सिद्धान्त, पूर्ण एवं अपूर्ण प्रतियोगिता में मजदूरी निर्धारण। मुद्रा एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार-मुद्रा की मांग एवं मुद्रा की पूर्ति, मुद्रा का मूल्य, फिशर तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय समीकरण, मुद्रास्फीति, संस्फीति एवं मंद्रीस्फीति वर्तमान भारतीय मौद्रिक प्रणाली, व्यापारिक बैंकों की आधुनिक प्रवृत्तियों, साखा निर्माण, केन्द्रीय बैंक के कार्य, साख नियन्त्रण के परिमाणात्मक एवं गुणात्मक तरीके, अल्पविकसित अर्थ व्यवस्था में मौद्रिक नीति।

अन्तर्राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार– तुलनात्मक लागत सिद्धान्त, स्वतन्त्र व्यापार एवं संरक्षण की विधियाँ व्यापार की शर्ते। विनिमय दर, क्रयशील समता सिद्धान्त भुगतान संतुलन सिद्धान्त, व्यापारशेष एवं भुगतानशेष, असंतुलन के कारण एवं समाधान। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष, अन्तर्राष्ट्रीय पुननिर्माण एवं विकास बैंक, एशियन विकास बैंक, विश्व व्यापार संगठन, राजस्व एवं रोजगार सिद्धान्त निजी एवं सार्वजनिक वित्त, अधिकतम सामाजिक कल्याण सिद्धान्त ऐच्छिक, विनिमय सिद्धान्त कर एवं आर्थिक प्रभाव के सिद्धान्त, कर एवं शुल्क, विशेष निर्धारण, कर देय क्षमता, करों में न्याय, कराघात एवं करापात, करभार के सिद्धान्त, सार्वजनिक व्यय के उद्देश्य एवं सिद्धान्त, हीनार्थ प्रबंधन सार्वजनिक ऋण भार एवं शोधन। राजकीय नीति केन्द्र एवं राज्य सरकारों के आय-व्यय स्रोत। परंपरावादी एवं कीन्स का रोजगार सिद्धान्त, आर्थिक प्रणालियां पूजीवाद, समाजवाद एवं मिश्रित अर्थव्यवस्था ।

भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आर्थिक विकास-भारतीय अर्थव्यवस्था की विशेषताएं, गरीबी एवं विकास जनसंख्या प्रवृत्ति एवं जनसंख्या, नीति, राष्ट्रीय आय का वितरण एवं संरचना, भूमि सुधार, लघु एवं सीमान्त कृषक, कृषि की समस्यायें एवं समाधान, कृषि विपणन, अल्परोजगार की समस्या, दृश्य एवं अदृश्य बेरोजगारी, कारण एवं समाधान।

औद्योगीकरण की समस्यायें– नई औद्योगिक नीति, कुटीर एवं लघु उद्योग की समस्यायें, श्रम समस्या, श्रम संघों की भारत में भूमिका, औद्योगिक विवाद।

भारत में विदेशी व्यापार-संरचना एवं आधुनिक प्रवृत्तियाँ। आयात-प्रतिस्थापना। आर्थिक विकास एवं आर्थिक प्रगति, आर्थिक विकास की कमी के कारण, पूंजी निर्माण, रोस्टो के आर्थिक विकास के सोपान । आर्थिक विकास के सिद्धान्त, न्यूनतम प्रयास सिद्धान्त, विकास के उपाय, तकनीक के भारत में पंचवर्षीय योजनायें।

(द) नागरिक शास्त्र– राजनीतिक सिद्धान्त राजनीति शास्त्र, परिभाषा, प्रकृति, विषय क्षेत्र एवं राज्य परिभाषा निर्माणक तत्व, राज्य की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्त, राजनीतिक अवधारणायें संप्रभुता, कानून एवं दण्ड के सिद्धान्त, स्वतन्त्रता, समानता अधिकार, नागरिकता, प्रजातन्त्र एवं अधिगायफ तन्त्र। पाजनीतिकवाद, व्यक्तिवाद, उदारवाद, फासीवाद, एवं वैज्ञानिक समाजवाद । 

राजनीतिक दार्शनिक– प्लेटी, अरस्तू, हाक्स लाक और रूसों, बेन्थम और जे०ए० मिल0 कार्ल मार्क्स, मनु, कौटिल्य और गाँधी।

शासन एवं राजनीतिक, भारतीय संदर्भ में संविधान, परिभाषा एवं वर्गीकरण, सरकार के प्रकार, संसदात्मक एवं अध्यात्मक, एकात्मक एवं संघात्मक, संस्कार के अंग व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, निर्वाचन प्रणाली, चुनाव आयोग, चुनाव सुधार, राजनीति दल एवं मतदान व्यवहार, भारतीय राजनीतिक प्रणाली गोखले, तिलक, गाँधी, नेहरू, सुभाष, जिन्ना, एवं डा0 बी0 आर0 अम्बेडकर का राष्ट्रीय आन्दोलन में योगदान, भारतीय, संविधान, मुख्य विशेषताएं/ मौलिक अधिकार एवं राज्य के नीति निर्देशक तत्व, संघ सरकार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद संसद व सर्वोच्च न्यायालय न्यायिक सक्रियता राज्य सरकार राज्यपाल मुख्यमंत्री केन्द्र, राज्य संबंध, जिला प्रशासन, जिलाधिकारी, लोकतान्त्रिक विकेन्द्रीकरण एवं पंचायती राज, भारतीय लोकतन्त्र की कुस्तारी भारतीय राजनीति में जातिवाद क्षेत्रवाद एवं सांप्रदायिकता, राजनीतिक दल, राष्ट्रीय एकीकरण की समस्या, राजनीतिक दल एवं दबाव समूह भारतीय प्रशासन नौकरशाही अम्बुडसमैन लोकपाल एवं लोकायुक्त भारत एवं संयुक्त राष्ट्र संघ।

आलोक-उपरोक्त चार विषयों में से प्रत्येक अभ्यर्थी को किन्ही दो विषयों के प्रश्नों को हल करना होगा।

UP TGT Art Syllabus

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-कला (10)

भारत के प्रागैतिहासिक कलाकेन्द्र जैसे मिर्जापुर, भीमबैठका, सयगढ़. बाँदा, पंचमढ़ी. होशंगाबाद इत्यादि सिन्धु घाटी सभ्यता की कला (हड़प्पा और मोहन जोदड़ों) भारतीय चित्रकला के छ: अंक जोगीमारा अजन्ता, बाघ, बाढ़ामी, एलोरा, सित्तनवासल इत्यादि के विभत्तिचित्र, भारतीय लघु चित्रकला (जैन, पाल, अपभ्रंश) राजस्थानी, शैली (बूढी, कोटा, किशनगढ़, जयपुर इत्यादि) मुगल शैली (अकबर, जहांगीर, शाहजहाँ, औरगंजेब) पहाडी शैली (कांगड़ा, बसौली, इत्यादि) बंगालशैली और उसके कलाकर जैसे अवनीन्द्र नाथ ठाकुर, नन्द लाल बोस. असित कुमार हल्दार डी0पी0 राय चौधरी क्षितीन्द्र नाथ मजुमदार इत्यादि, समसामयिक चित्रकला और उसके मुख्य कलाकार, जैसे राजा रवि वर्मा, रवीन्द्र नाथ ठाकुर, गगनेन्द्र नाथ ठाकुर, यामिनी राय, अमृता शेरगिल, एन०एस०बन्दे, के0 के0 हेब्बर, के एस० कुलकर्णी, एम०एफ0 हुसैन के०एच० आरा इत्यादि। कला के तत्व जैसे रेखा आकार वर्ण तान, पात अन्तराल, चित्र संयोजन के सिद्धान्त जैसे-सहयोग, सामंजस्य संतुलन, प्रभावितलय अनुपात, परिप्रेक्ष्य और उसका चित्रकला में महत्व।

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-संगीत गायन (12)

गायन:-

1. भारतीय संगीत का उद्भव एवं विकास (ऐतिहासिक विवेचन)।

2. निम्नलिखित पारिभाषिक शब्दों की पूर्ण व्याख्या- संगीत, नाद, श्रुति, स्वर, अलंकार, सप्तक, थाट, राग, आलाप, तान, जाति, ग्राम, मूर्च्छना, गमक, मार्गी, देशी, रागांग, भरत कृत सारणा चतुष्टयी, ‘ध्वनि विवर्तन, अनुनाद, इष्ट एवं अनिष्ट स्वर ।

3. ‘निम्न रागों का अध्ययन, विशेषता स्वर विस्तार, राग की बढ़त एवं आलाप तान सहित लिपिबद्ध करने की क्षमता’। स्वर के छोटे-छोटे टुकड़ों के माध्यम से राग पहचानने की निपुणता। ‘राग का सरगम, गीत, आरोह-अवरोह, पकड़ की जानकारी। राग बिलावल, भूपाली, काफी, आसावरी, यमन, भैरव, बिहाग, भीमपलासी, मालकौंस. केदार, पूर्वी, तोड़ी, दरबारी, मियाँमल्हार का पूर्ण अध्ययन।

4. निम्न तालों की पूर्ण जानकारी- दादरा, कहरवा, रूपक, झूमरा, झपताल, सूलताल, एकताल, चारताल, धमार, दीपचन्दी, आड़ाचारताल, पंचमसवारी, गजझम्पा, तीनताल व तिलवाड़ा। ताल, मात्रा, लय, आवर्तन, ताली, खाली आदि पारिभाषिक शब्दों की व्याख्या एवं तालों की दुगुन, तिगुन, चौगुन, आड़ लयकारी निकालने की जानकारी।

5. गीत की विभिन्न शैलियों:- ध्रुपद, धमार, ख्याल, सरगम, टप्पा, ठुमरी, तराना, चतुरंग, होली, भजन, कजरी गीत की जानकारी।

6. तानपूरा, तबला, हारमोनियम वाद्य का सामान्य अध्ययन ।

7. कर्नाटक एवं हिन्दुस्तानी स्वरों का अध्ययन।

8. प्रमुख संगीतज्ञों का जीवन परिचय एवं सांगीतिक योगदान- तानसेन, स्वामी हरिदास, पं0 विष्णु दिगम्बर पलुष्कर, पं० विष्णु नारायण भातखण्डे, पं० ओंकारनाथ ठाकुर, मतंग, अहोबल, अमीर खुसरो।

UP TGT Music Syllabus

पाठ्यक्रम – प्रशिक्षित स्नातक – विषय-संगीत वादन (13)

अवनद्ध

1. पारिभाषिक शब्दों की व्याख्याः-

ताली, खाली, आवर्तन, विभाग, तिहाई, पेशकारा, कायदा, गत, टुकड़ा, मुखड़ा, परन, रेला, स्वर, श्रुति, सप्तक, थाट, संगीत, ताल, लय, ठेका, मात्रा, सम।

2. संगीत का इतिहास।

3. तीनताल, झपताल, एकताल, आड़ाचारताल, पंचभसवारी, रूपक, चारताल, सूलताल, तीवरा, धमार, गजझम्पा, लक्ष्मी, शिखर, ब्रहा, दीपचन्दी, जत, तिलवाड़ा, झूमरा, कहरवा एवं दादरा, इन तालों का परिचय, ठेका, दुगुन, तिगुन, चौगुन तथा आड (3/2) की लयकारी में ताललिपिबद्ध करने क्षमता।

4. दिए गए बोलों के आधार पर तालों को पहचानने की क्षमता।

5. वाद्य एवं उनका वर्गीकरण।

6. अपने वाद्य के जन्म एवं विकास का विस्तृत अध्ययन।

7. वाद्य को मिलाने की विधि का ज्ञान।

8. अपने वाद्य के सभी घरानों एवं उनकी वादन शैली की विशेषताओं का अध्ययन।

9. भातखण्डे एवं विष्णुदिगम्बर पलुस्कर ताललिपि पद्धति का विस्तृत अध्ययन।

10. अपने वाद्य के अंगों का विस्तृत अध्ययन।

11. कायदा, पेशकारा, टुकड़ा, परन, तिहाई, आदि बोलों को ताललिपि में लिखने का ज्ञान।

12. पं० भैरव सहाय, नाना साहब पानसे, पं0 कण्ठे महाराज, उ० अल्लारखा खां का जीवन परिचय तथा संगीत में योगदान ।

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